ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत मुख्यालय परिसर एवं आसपास लगे लिपटिस, जामुन और बर्रा (बरगद) जैसे बड़े‑बड़े पेड़ आज लोगों के लिए राहत कम और खतरा अधिक बनते जा रहे हैं। वर्षों पुराने ये पेड़ अब जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं। अस्पताल के सामने लगा लिपटिस का पेड़ एक ओर झुका हुआ है, जिसकी जड़ें कमजोर हो चुकी हैं। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
*जनपद पंचायत कार्यालय, जनपद शिक्षा केंद्र, लोकसेवा केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, बिजली कार्यालय, एसडीएम कार्यालय, तहसील कार्यालय, सिविल कोर्ट।- *प्रभावित क्षेत्र:* मुख्यालय परिसर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण, अधिकारी, कर्मचारी, अधिवक्ता और मरीजों के परिजन आते हैं।
जोखिम:* गर्मी के मौसम में तेज धूप से बचने के लिए लोग इन्हीं पेड़ों के नीचे खड़े रहते हैं। जामुन और बर्रा के पेड़ घनी छांव देते हैं, जबकि लिपटिस के पेड़ ऊंचे और भारी होते हैं।
*वाहन पार्किंग:* दोपहिया और चारपहिया वाहन भी इन पेड़ों के नीचे खड़े रहते हैं, जिससे वाहन क्षति और जनहानि का खतरा बढ़ जाता है।
स्थानीय नागरिकों की मांग- *विशेषज्ञ जांच:* तत्काल विशेषज्ञों से इन पेड़ों की स्थिति की जांच कराई जाए।
*पेड़ों की छंटाई/निकालना:* अत्यधिक जर्जर या झुकी हुई अवस्था वाले पेड़ों को हटाया जाए या सुरक्षित किया जाए।
*वैकल्पिक व्यवस्था:* गर्मी के मौसम को देखते हुए वैकल्पिक छायादार एवं सुरक्षित इंतजाम किए जाएं।
पूर्व में की गई कार्रवाई- स्थानीय नागरिकों ने पहले भी प्रशासन का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित कराया है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।- जिम्मेदार विभागों की लापरवाही किसी बड़ी दुर्घटना को न्योता दे रही है। प्रशासन की जिम्मेदारी
जनपद सीईओ यजुर्वेद कोरी ने बताया कि मामले की जांच की जाएगी और खतरनाक पेड़ों के संबंध में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।





