कुकड़ेश्वर। नरेन्द्र चौधरी@जिनवाणी के आधार पर हमे जिवन में क्या, क्या करना है आप को चातुर्मास के चार माह मिले ओर उसमें से प्रन्द्रह दिन बीत गये आपने बताया कि समय पानी की तरह है ये बहता पानी है इसका सद्उपयोग कर लेवे ओर अपनी प्यास बुझा ले उक्त बात प्रवचन माला के दौरान आचार्य श्री रामलाल जी म, सा, की आज्ञाननुवती परम पूज्य श्री प्रेमलता जी महारासाहेब ने धर्म प्रभावना देते हुए बताया कि आगम वाणी हमे जिवन जिने की कला बता रही हैं जिसमें एक कला ये है "" कर्ज चड़े ऐसा खर्च ना करे """ समय बहता पानी है जिसने इससे प्यास बुझा ली उसका जीवन सफल है प्रभु हमें बता रहे हैं की हैसियत से ज्यादा खर्च करना व कर्जा लेना तो आसान है लेकिन कर्ज चुकाना मुश्किल है और कर्ज तो इस जन्म मे नही तो अगले जन्म में कभी भी चुकाना पड़ता है कहते हैं कर्ज़ वह तो किसी भी जन्म में चुकाना पड़ेगा इसलिए आचार्य भगवन रामेश ने उक्रांति चलायी है मानव समल जाये अपन शानो शौकत के लिए जो फिजूल खर्च कर रहे हैं और कर्जा सर पर चढ़ा रहे हैं उसे उतारना पड़ता है आगमवाणी हमें बताती हैं कर्ज प्रकार के होते हैं उसे जीवन में उतारना पड़ता है मां-बाप का कर्ज़ पति पत्नी का कर्ज़ गुरु का कर्ज़ हम जन्म लेते ही कर्जदार बन जाते हैं उसे धर्म आराधना व संस्कारों के साथ रहकर कर्ज चुका दें अन्यथा में अगले जन्म में न जाने कौन सा भव मिले उस कर्ज को उतारने के लिए हमें बार-बार जन्म लेना पड़ा है तो कर्जा ऐसा करो ना जिसे चुकाने में तकलीफ है ऐसा कार्य मत करो भगवान महावीर ,जिनवाणी, आचार्य भगवन ,साधु संत हमें जीवन जीने की कला सिखा रहे उसको आत्मसात कर अपने मानव जीवन को सुखी बना ले जन्म जन्मान्तर की भव भटकना को मिटा ले इस अवसर पर शांत स्वभावी ग्रेजुएट परम पूज्य श्री मर्यादा श्री जी मारासाहब ने अपने सु मधुर गीतिका के साथ हमें आगम के बारे में बताया 32 आगम में से 29 आगम सम्यतन पराक्रम सूत्र श्रीउतराध्यनसूत्र के बारे में बताया आपने कल धेर्य के बारे में विस्तारपूर्वक समझाया था अगर मानव जीवन धैर्य होगा तो श्रद्धा आएगी श्रद्धा कैसी हो इस पर आपने विशेष प्रकाश डाला और बताया श्रद्धा से किया गया कार्य मोक्ष के मार्ग तक पहुंचा देता है पराक्रम का अर्थ तत्व जैसा है वैसा मानना आपने भगवान महावीर स्वामी गौतम गणधर एवं सुधर्मा स्वामी जम्मू स्वामी के बारे में विस्तार से बताया एवं आपने बताया अभिमान को त्यागना बहुत बड़ी बात है अगर हमने जीवन में अभिमान अहंकार को त्याग दिया व सच्ची श्रद्धा से कार्य किया तो अपना जीवन सफल होगा और जागृति लाकर हमें जीवन में अध्यन से ज्यादा सुनना चाहिए अगर एक चित्त होकर हमने सुना तो कहते हैं ""अच्छा श्रोता ही अच्छा वक्ता बन सकता है""" तो हमें अच्छा श्रोता बनकर धर्म आराधना व प्रवचन का लाभ लेकर अपने जीवन में उतारना है एवं मानव जीवन को सफल बनाना है उक्त अवसर पर संचालन सतीश खाबिया ने किया उक्त जानकारी शाखा प्रभारी मनोज खाबिया ने प्रदान की प्रवचन में सकल जैन समाज व कई अजैन भाई बहन लाभ उठा रहे हैं
कर्ज चड़े ऐसा खर्च मत करो सुख पाओगे।प, पू, श्री प्रेमलता जी महारासाहेब




