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निलंबित रखी गई महाराष्ट्र विधानसभा, जानिए क्या है इसका मतलब

महाराष्ट्र की सियासी महाभारत के अठारहवें दिन मंगलवार को अनिश्चितता पर फिलहाल विराम लग गया। किसी दल द्वारा सरकार बनाने के लिए ठोस दावा पेश नहीं करने के कारण राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की सिफारिश पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लगाने का फैसला किया। कैबिनेट के फैसले पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मुहर लगते ही शाम करीब 6 बजे यह लागू हो गया। उधर, नाराज शिवसेना ने दूसरे दलों के समर्थन-पत्र पेश करने के लिए तीन दिन की मोहलत नहीं देने के राज्यपाल के फैसले को असंवैधानिक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट की शरण ली है। विधानसभा निलंबित रखी गई राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंगलवार शाम महाराष्ट्र में अनुच्छेद 356 (1) के तहत राष्ट्रपति शासनलागू करने की अधिसूचना जारी कर दी। इसमें राज्य की विधानसभा को निलंबित रखा गया है। यह है आशय : विधानसभा निलंबित रखने का मतलब है कि यदि राष्ट्रपति शासन के दौरान भी कोई दल या गठबंधन सरकार बनाने का दावा करता है और बहुमत होने के ठोस सबूत पेश करता है तथा राज्यपाल उससे आश्वस्त हों तो विधानसभा को बहाल करते हुए सदन में शक्ति परीक्षण की शर्त पर सरकार बनाने का मौका दे सकते हैं। राज्यपाल ने रिपोर्ट में कहा राज्य में ऐसे हालात पैदा हो गए हैं कि चुनावी नतीजे आने के 15 दिन बाद भी स्थिर सरकार के गठन की संभावना नहीं है। सारे संभव प्रयास किए गए, लेकिन स्थाई सरकार की कोई संभावना प्रतीत नहीं हुई। राकांपा ने मांगे थे तीन दिन और राज्यपाल ने मंगलवार दोपहर केंद्र को भेजी रिपोर्ट में दावा किया है कि राकांपा ने मंगलवार सुबह उन्हें सूचित किया कि उसे आवश्यक बहुमत जुटाने के लिए तीन दिन और चाहिए। इस पर राज्यपाल ने महसूस किया कि 15 दिन पहले ही हो चुके हैं, वह और वक्त नहीं दे सकते। इसलिए उनके पास संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत केंद्र को रिपोर्ट भेजने के अलावा उनके पास कोई चारा नहींथा। सावंत का इस्तीफा मंजूर राष्ट्रपति ने शिवसेना नेता अरविंद सावंत का केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा भी मंजूर कर लिया। उनका भारी उद्योग मंत्रालय का प्रभार सूचना व प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को सौंपा गया है। केंद्र ने रिपोर्ट पर विचार कर राष्ट्रपति को भेजी सिफारिश राज्यपाल द्वारा भेजी गई रिपोर्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आपात बैठक बुलाकर विचार किया गया। उसके बाद अनुच्छेद 356 (1) के तहत राष्ट्रपति शासन का फैसला करते हुए सिफारिश राष्ट्रपति को भेजी गई थी। खरीद-फरोख्त का जिक्र नहीं केंद्र के एक अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति शासन छह माह के अंदर हटाया भी जा सकता है, यदि कोई गठबंधन आगे आए और स्थिर सरकार बनाने की स्थिति बने। यह पूछने पर कि क्या राज्यपाल ने अपनी रिपोर्ट में विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) का जिक्र किया है, अधिकारी ने कहा कि प्रत्यक्ष तौर पर ऐसी कोई बात नहीं कही गई।

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