नीमच 11 जनवरी (केबीसी न्यूज)। शिव शक्ति आश्रम के परमाध्यक्ष वीतरागी संत श्री श्री 1008 ब्रहमलीन श्री कमलानंदगिरी महाराज की षोडशी, श्रद्धाजंलि सभा, चादर (पगड़ी) विधि भण्डारा का आयोजन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ शनिवार 11 जनवरी 2020 को सुबह श्री शिव शक्ति आश्रम ग्राम लेवड़ा में आयोजित किया गया । कार्यक्रम का शंखनाद ब्रहमलीन स्वामी कमलानंदगिरीजी महाराज की समाधि पर षोडसो उपचार विधि पूजन सुबह 9.30 बजे विभिन्न विद्ववान पंडितों द्वारा मंत्रोच्चार के साथ किया गया । इस अवसर पर स्वामी कमलानंदगिरीजी महाराज के उत्तराधिकारी के रूप में उनकी शिष्या साध्वी कृष्णनंदगिरी को देशभर से आये विद्ववान संतो की उपस्थिति में चादर (पगड़ी) विधि के साथ आश्रम की जिम्मेदारी सौंपी गई । धर्मसभा में 1008 महा मण्डलेश्वर साध्वी स्वामी डाॅ हेमानंद सरस्वती, 1008 श्री श्री महामण्डलेश्वर स्वामी मेडाश्रीगिरी, महंत डाॅ कमलदास महाराज, रामदास महाराज केलुखेड़ा, कर्नल सुरेन्द्र, डाॅ गील, प्रहलाद मालु, रमेश डाड आदि ने कृष्णानंदगिरी महाराज के धर्म अध्यात्म से जुड़े जीवन चरित्र के वर्तमान परिपेक्ष्य में महत्व पर प्रकाश डाला और स्वामी के पदचिन्हों पर चलकर उनके अधुरे सेवा प्रकल्पों को पुरा करने को ही सच्ची श्रद्धाजंलि बताया । धर्मसभा में संतों का जीवन परिचय जम्बुकुमार जैन ने प्रस्तुत किया । धर्मसभा में उपस्थित सभी संतों का आश्रम की ओर से समाजसेवी भक्त अशोक गंगानगर ने शाॅल, श्रीफल से सम्मान कर आर्शीवाद ग्रहण किया । इस अवसर पर महंत लालनाथ, भक्त घीसालाल धाकड़, पं. विक्रम शास्त्री, चर्तुभूज शास्त्री, जगदीश शास्त्री, यशवंत शर्मा, शांतिलाल शर्मा सहित बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी भक्त मौजूद थे । कमलानंदगिरी महाराज का धर्म अध्यात्म जीवन चक्र- श्री श्री 1008 कमलानंदगिरीजी महाराज अल्पायु में ही सत्य के अन्वेषणार्थ वैराग्य पथ पर अग्रसर श्री श्री 1008 कमलानंदगिरी महाराज का जन्म छपरा बिहार में हुआ । गृह त्याग के बाद भारत भ्रमण के दौरान अनेक ऋषि-मुनियों, विद्धत्जनों एवं संतों के साथ आध्यात्मिक समागम से सन्यास धारण करने की इच्छा प्रबल होती गई । अयोध्या निवासी श्री अयोध्यादास गिरी महाराज से दीक्षा लेकर सन्यास मार्ग पर प्रवृत्त हुए । अरावली पर्वत के सुरम्य आंचल में स्थित महर्षि शांडिल्य मुनि की तपःस्थली श्री सांडेश्वर महादेव मंदिर पर भक्ति की ज्योति प्रज्वलित की । तत्पश्चात् लेवड़ा स्थित श्री शिव शक्ति मठ पर महाराजश्री का पदार्पण हुआ और तपस्या व आध्यात्मिक अनुष्ठान का अनवरत क्रम चलता रहा । वर्ष 2016 में उज्जैन में सम्पन्न सिंहस्थ में महाराजश्री ने पंच दीक्षा ली । सहज, सरल व्यक्तित्व के धनी महाराजश्री का आम जनमानस से सीधा जुड़ाव रहा । यही कारण रहा कि अंचल में आप गुरूजी के नाम से विख्यात थे । भगवान दत्तात्रेय एवं जगत्जननी माॅं दुर्गा के अनन्य उपासक महाराजश्री ने माउंट आबू, पुष्कर, भरूच सहित लेवड़ा स्थित आश्रम पर भागवत कथा, यज्ञ, प्रतिष्ठा, शतचण्डी, सहस्त्र चण्डी, महारूद्र यज्ञ साधनाएं की । आश्रम पर महाराजश्री से आध्यात्मिक सत्संग हेतु संत-महात्माओं और आमजन का आवागमन बना रहता था । अंचल में श्री शिवशक्ति आश्रम को आध्यात्मिक केन्द्र के रूप में जाना जाता है । महाराजश्री ने कुछ वर्षो पूर्व अपनी सुशिष्या साध्वी कृष्णानंदगिरी को उत्तराधिकारी के रूप में चयनित कर उन्हें आश्रम की समस्त जिम्मेदारियों सौंपकर अधिकाधिक समय साधना में लीन रहने लगे थे । 27 दिसम्बर 2019 को महाराजश्री ने अपने स्थूल शरीर को त्यागकर अनन्त यात्रा की ओर महाप्रयाण कर लिया। महाराजश्री का स्थूल शरीर तो इस जगत में नहीं अपितु उनका सूक्ष्म शरीर सदैव श्री शिवशक्ति आश्रम लेवड़ा एवं उनके भक्तवृन्द को सदा आलोकित करता रहेगा ।
कमलानंदगिरी महाराज के षोडशी भंडारा में उमड़ा आस्था का जनसैलाब




