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ज्योतिरादित्य सिंधिया का ऐसा रहा है राजनीतिक सफर, पिता के देहांत के बाद संभाली थी कमान

मध्यप्रदेश में पिछले दो दिनों में अचानक बदले राजनीतिक घटनाक्रम में प्रदेश कांग्रेस के बड़े और युवा चेहरे Jyotiraditya Scindia को सूत्रधार बताया जा रहा है। सिंधिया खेमे के विधायकों और मंत्रियों ने कमलनाथ सरकार से इस्तीफे देने के बाद प्रदेश में नए सियासी समीकरण पैदा कर दिए। कयास लगाए जा रहे हैं कि इसके बाद सिंधिया पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो सकते हैं और भाजपा के टिकट पर राज्यसभा जा सकते हैं। हालांकि, इसका खुलासा कुछ देर में हो जाएगा। राज्य में कांग्रेस की मजबूत कड़ी रहे संधिया ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत अपने पिता और स्व. माधवराव सिंधिया के देहांत के बाद किया था। आईए नजर डालते हैं उनके इसी सफर पर। ज्योतिरादित्य सिंधिया का जन्म 1 जनवरी 1971 को मुंबई में हुआ था और उन्होंने 1993 में हावर्ड यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र की डिग्री ली। इसके बाद 2001 में उन्होंने स्टैनफोर्ड ग्रुजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस से MBA किया। ज्योतिरादित्य की 1984 बड़ौदा के गायकवाड़ घराने की प्रियदर्शिनी से शादी हुई है और उनके एक बेटा महा आर्यमान और बेटी अनन्याराजे हैं। राजनीतिक सफर की बात करें तो सिंधिया घराने से संबंध रखने के कारण उन्हें राजनीति विरासत में मिली क्योंकि पिता स्व. माधवराव सिंधिया अपने समय के दिग्गज कांग्रेस नेता रहे वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया की बुआएं भी राजनीती में सक्रिय हैं। उनके पिता स्व. माधवराव संधिया 9 बार सांसद रहे थे। शुरुआत में जनसंघ के टिकट से चुनाव लड़ने के बाद वो कांग्रेस में शामिल हो गए। ज्योतिरादित्य ने 2002 में पहली बार पिता के देहांत के बाद उनकी पारंपरिक गुना सीट से चुनाव लड़ा और लोकसभा पहुंचे। 2004 में भी उन्होंने इसी सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की लेकिन 2019 में वो अपनी इस सीट से चुनाव हार गए। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 2007 में पहली बार केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में मनमोहन सरकार में जिम्मा संभाला। इसके बाद 2012 में भी वो केंद्रीय राज्य मंत्री रहे। 2019 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद पार्टी ने उन्हें मध्यप्रदेश में कोई बड़ा पद देने की बजाय कांग्रेस महासचिव बना दिया। राज्य के विधानसभा चुनाव में संधिया को मुख्यमंत्री का चेहरा माना जा रहा था लेकिन नतीजों के बाद कमलनाथ मुख्यमंत्री बन गए।

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