पोंपियो की पहल पर भारत, जापान, इजरायल, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया व ब्राजील के विदेश मंत्रियों ने की बैठक। जयप्रकाश रंजन। चीन के वुहान शहर से फैले कोरोना वायरस के संक्रमण ने न सिर्फ दुनियाभर में लोगों की जान ली है, बल्कि इसके प्रकोप को रोकने के लिए लगाए गए लॉक डाउन की वजह से अर्थव्यवस्था पटरी से उतर रही हैं। देशों में बेरोजगारी चरम स्तर पर पहुंच रही है। अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी तो पहले से ही इस मामले को लेकर चीन को घेर रहे थे, लेकिन अब इस महामारी का दुनिया के कूटनीतिक माहौल पर भी बहुत बड़ा असर होने वाला है। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, इजरायल और ब्राजील के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक कर चीन को अभी तक का सबसे बड़ा और कड़ा संदेश दिया है। बैठक में Covid-19 को लेकर ज्यादा पारदर्शिता बरतने का मुद्दा उठा। पोंपियो की पहल पर हुई इस बैठक को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन पर लगातार निशाना साधने की रणनीति के अगले चरण के तौर पर देखा जा रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि पोंपियो की भारत सहित छह देशों के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक में कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में अंतरराष्ट्रीय सहयोग, पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने के मुद्दे पर चर्चा हुई। इनके बीच भविष्य में होने वाले स्वास्थ्य संबंधी संकट और कानून सम्मत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था कायम करने के विषय पर भी बातचीत हुई है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय का यह बयान पूरी तरह से चीन को निशाना बनाने वाला है। अमेरिका लगातार चीन पर आरोप लगा रहा है कि उसने कोविड-19 को लेकर पारदर्शिता से काम नहीं किया और समय पर दुनिया को इस महामारी के बारे में सूचना नहीं दी। राष्ट्रपति ट्रंप तो शुरू से ही कोरोना वायरस को चाइना वायरस कहकर चीन को घेरते रहे हैं। मगर, ऐसा पहली बार हुआ है जब अमेरिका ने कुछ प्रमुख देशों को कोविड-19 पर विचार-विमर्श के लिए एक साथ एकत्रित किया है। अब उसके साथ ही जापान के विदेश मंत्री मोतेगी तोशीमित्सु और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री मेरिस पेयने ने भी कोविड-19 को लेकर पारदर्शी व्यवहार करने की बात कही है। भारत ने अभी तक कोरोना वायरस के बारे में अपनी राय जाहिर नहीं की है और वह इस संबंध में अपने पड़ोसी देश चीन के प्रति तल्खी दिखाने से बच रहा है। फिलहाल भारत सरकार का एक मात्र लक्ष्य कोरोना के संक्रमण से निपटना है क्योंकि महामारी को लेकर किसी देश ने क्या भूमिका निभाई है, इस पर बाद में बात की जा सकती है। हालांकि, भारत ने अपनी एफडीआई नीति में बदलाव कर चीनी कंपनियों के भारत में प्रवेश को काफी हद तक रोक दिया है। भारत के इस कदम से तिलमिलाए चीन ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया भी जताई थी। हाल के दिनों में दोनों देशों की सेनाओं के बीच भी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कुछ झड़पों की बातें सामने आई हैं।
चीन को सबसे कड़ा संदेश : घेरेबंदी के लिए साथ आए सात देश, कोरोना से निपटने के लिए हुई चर्चा




