न स्लाइड बुक हुई, न तौल हुई, न कोई जवाब मिला।गेहूं उपार्जन केंद्र इन दिनों किसानों के लिए राहत का ठिकाना नहीं, बल्कि परेशानी का अखाड़ा बन गया है।
सरकार ने समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए ई-उपार्जन केंद्र खोले हैं। लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।
केंद्र पर स्लाइड बुकिंग की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जिन किसानों की स्लाइड बुक हो चुकी है, उन्हें भी गेहूं चढ़वाने में घंटों की मशक्कत करनी पड़ रही है। सिस्टम में तकनीकी दिक्कत, कुप्रबंधन — सब मिलकर किसान को तोड़ रहे हैं
,*42 डिग्री की धूप में खड़ा किसान*
अप्रैल की तपती दोपहर में जब पारा 42 डिग्री के पार है, तब ये किसान सुबह से कड़ी धूप में चलकर आते हैंहर बार सिस्टम नहीं चल रहा। हम क्या करें? घर में अनाज पड़ा है, पैसा नहीं है।"
घर में शहनाई, दिल में चिंता
शादी का मौसम।इन्हीं दिनों गांव-गांव में विवाह समारोह चल रहे हैं। किसान चाहते थे कि गेहूं बेचकर बेटे-बेटियों की शादी का खर्च निकालें। लेकिन सरकार की अव्यवस्था ने उनके हाथ खाली रखे हैं।किसानों कि आंखे नम
सादी का सीजन गेहूं बिक जाएगा तो बाजार जाएंगे। अब उधार मांगना पड़ेगा।"किसानों का सीधा सवाल ये ढकोसला क्यों?किसानों का गुस्सा अब सड़क पर आने लगा है। उनका सवाल सीधा है अगर खरीदी करनी नहीं है, तो केंद्र खोला क्यों? हमें चक्कर क्यों लगवा रहे हो"किसानों ने स्पष्ट मांग रखी है —
स्लाइड बुकिंग की प्रक्रिया तत्काल दुरुस्त की जाए तकनीकी व्यवस्था की ज़िम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो
इस पूरे मामले में स्थानीय प्रशासन और सरकार की चुप्पी सबसे बड़ा सवाल है। बार-बार शिकायत के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
एक किसान का दर्द बयां करता




