ढीमरखेड़ा। सरकार के 'सड़क कनेक्टिविटी' के दावे ढीमरखेड़ा विकासखंड में खोखले साबित हो रहे हैं। पोड़ी से खिरवा को जोड़ने वाला डेढ़ किलोमीटर का मार्ग बदइंतजामी की तस्वीर पेश कर रहा है। लोक निर्माण विभाग के अधीन यह सड़क वर्षों से उपेक्षा का शिकार है। बरसात में कीचड़ के दलदल और गर्मी में धूल-गड्ढों से राहगीरों का निकलना मुश्किल हो गया है।
*कई गांवों की लाइफलाइन, फिर भी उपेक्षित*
यह डेढ़ किलोमीटर का मार्ग केवल पोड़ी और खिरवा को ही नहीं जोड़ता, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों के लिए मुख्य संपर्क मार्ग है। इसी रास्ते से स्कूली बच्चे पढ़ने जाते हैं। किसान फसल मंडी ले जाते हैं। दिहाड़ी मजदूर रोजगार के लिए निकलते हैं। मरीज और गर्भवती महिलाएं इलाज के लिए अस्पताल पहुंचती हैं। इतनी महत्वपूर्ण सड़क होने के बाद भी पीडब्ल्यूडी के अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे। विभाग की अनदेखी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
*बरसात में हालात भयावह, हर कदम पर हादसे का डर*
मानसूनी बारिश ने सड़क का बचा-खुचा अस्तित्व भी खत्म कर दिया है। कच्ची सड़क पर जगह-जगह दो से तीन फीट गहरे गड्ढे बन गए हैं। इनमें पानी और कीचड़ भरने से रास्ते का अंदाजा लगाना मुश्किल है। वाहन चालक समझ नहीं पाते कि गाड़ी सड़क पर है या कीचड़ के कुएं में। दोपहिया वाहन फिसलकर गिरना रोज की बात हो गई है। साइकिल सवार, पैदल राहगीर और स्कूली बच्चे फिसलकर घायल हो रहे हैं। बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए यहां चलना अग्निपरीक्षा जैसा है।
*नौनिहालों का भविष्य दांव पर*
इस लापरवाही की सबसे बड़ी कीमत स्कूली बच्चे चुका रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि बच्चे स्कूल जाने से डरते हैं। बारिश में गिरते-पड़ते, कीचड़ से सने कपड़ों और भीगे बस्तों के साथ स्कूल पहुंचते हैं। कई बार हालात इतने खराब हो जाते हैं कि माता-पिता बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर देते हैं। शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरत तक पहुंचने में यह रुकावट शासन के दावों पर सवाल खड़े करती है।
*स्वास्थ्य सेवाएं ठप, एम्बुलेंस भी कतराती है*
सड़क की खराब हालत से स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गंभीर बीमारी या प्रसव पीड़ा में जननी एक्सप्रेस और 108 एम्बुलेंस कीचड़ देखकर गांव के बाहर ही रुक जाती है। मरीजों को खाट पर या जुगाड़ गाड़ी से मुख्य मार्ग तक लाना पड़ता है। समय पर इलाज न मिलने से कई बार जान पर बन आती है।
*ग्रामीणों की चेतावनी: सड़क नहीं तो वोट नहीं*
पीडब्ल्यूडी के रवैये से त्रस्त ग्रामीणों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उनका कहना है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को शिकायत दी गई। हर बार केवल आश्वासन मिला। धरातल पर काम नहीं हुआ। अधिकारियों का कहना है कि प्रस्ताव भेजा गया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जल्द सड़क नहीं बनी तो वे आंदोलन करेंगे और चुनाव में वोट का बहिष्कार करेंगे।





