आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा और व्यापक सुधार की मांग को लेकर मंगलवार को ढीमरखेड़ा तहसील में सवर्ण समाज ने शांतिपूर्ण जनसभा कर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ढीमरखेड़ा को दिया गया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। मुख्य वक्ता के रूप में भेड़ा वाले ब्रह्मनंद दास जी महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन किसी जाति या समुदाय के विरोध में नहीं है। यह *आरक्षण विरोध नहीं, बल्कि आरक्षण सुधार आंदोलन* है। उद्देश्य किसी के अधिकार छीनना नहीं, बल्कि जरूरतमंद तक लाभ पहुंचाना है। समाज ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 अगस्त 2026 से चल रहे राष्ट्रव्यापी आंदोलन का समर्थन भी किया।
आर्थिक आधार पर आरक्षण: जातिगत आरक्षण की समीक्षा कर आर्थिक स्थिति को आधार बनाया जाए। वक्ताओं ने कहा गरीबी किसी जाति की पहचान नहीं है।
क्रीमीलेयर व्यवस्था: आरक्षित वर्ग के भीतर आर्थिक रूप से संपन्न परिवारों के लिए क्रीमीलेयर लागू हो, ताकि लाभ सबसे वंचित तक पहुंचे।
. UGC नियमों में रोलबैक:* विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों को वापस लिया जाए।
. SC-ST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश:* 2018 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों को पुनः लागू किया जाए।
. सवर्ण आयोग का गठन:* आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण परिवारों के मेधावी युवाओं के लिए सवर्ण योग बनाया जाए।
*भूख और आंसू की कोई जाति नहीं*
सभा में वक्ताओं ने कहा - "भूख की कोई जाति नहीं होती और आंसुओं का कोई धर्म नहीं होता। गरीबी उपनाम देखकर नहीं आती।" भारत तेजी से विकास कर रहा है, ऐसे में प्रतिभा और आर्थिक जरूरत दोनों को महत्व मिलना चाहिए।
वक्ताओं ने डॉ. भीमराव आंबेडकर, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और भारतीय सैनिकों का उदाहरण देते हुए कहा कि सरहद पर जवान जाति नहीं देखता, वैसे ही विकास में भी सबको समान अवसर मिलना चाहिए। प्रतिभा पलायन रोकने के लिए देश में ही बेहतर अवसर देने की मांग भी उठाई गई।
अंत में केंद्र सरकार से सभी वर्गों के हित में व्यापक और न्यायपूर्ण नीति बनाने की अपील की गई।





