मधुसूदन शर्मा की कलम से @ भरभड़िया। स्वतंत्र बौद्धिकपत्र की विशेष समाचार श्रृंखला “जमीनी हकीकत” की दूसरी कड़ी में भरभड़िया गांव के शासकीय स्कूल परिसर के पास मौजूद एक गंभीर सुरक्षा समस्या सामने आई है। स्कूल के टॉयलेट के समीप बारिश के पानी की निकासी के लिए बना करीब 15 फीट गहरा और लगभग 15 फीट चौड़ा खुला नाला लंबे समय से बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के पड़ा है। बताया जा रहा है कि यह नाला स्कूल भवन के निर्माण से पहले से मौजूद है। इसके बावजूद स्कूल परिसर के समीप स्थित इस गहरे नाले के आसपास बच्चों की सुरक्षा के लिए अब तक न फेंसिंग की गई है, न सुरक्षा दीवार और न ही बैरिकेडिंग लगाई गई है।
1 बच्चों के गिरने का खतरा
स्कूल के पास इतनी गहराई वाला नाला खुला होने से विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। बारिश के दौरान नाले में पानी का बहाव बढ़ने पर खतरा और अधिक बढ़ जाता है।
स्कूल आने-जाने वाले बच्चों के लिए यह स्थान विशेष चिंता का विषय है। जरा सी असावधानी या पैर फिसलने की स्थिति में बच्चा नाले में गिर सकता है।
2 टॉयलेट की दीवार को भी खतरा
नाले के बहाव के कारण स्कूल के टॉयलेट की दीवार को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। तेज बारिश में पानी के बहाव से मिट्टी कटने पर टॉयलेट के आसपास की जमीन कमजोर हो सकती है, जिससे भविष्य में दीवार के क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना हुआ है।
वहीं, यह नाला केवल स्कूली बच्चों के लिए ही खतरा नहीं है। ग्रामीणों के पशु भी खुले नाले में गिर सकते हैं, जिससे ग्रामीणों के सामने एक अलग समस्या बनी हुई है।
3 पंचायत ने नहीं किए सुरक्षा इंतजाम
मौके पर नाले के आसपास बच्चों और पशुओं को रोकने के लिए किसी प्रकार की फेंसिंग, सुरक्षा दीवार या बैरिकेडिंग दिखाई नहीं देती।
ऐसे में सवाल उठता है कि स्कूल के समीप मौजूद इस गहरे नाले को सुरक्षित करने के लिए जिम्मेदारों द्वारा अब तक कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया?
प्राचार्य ने पंचायत को पहले ही चेताया था
शासकीय स्कूल भरभड़िया के प्राचार्य ने बताया कि जब नाला गहरा किया गया था, तब उन्होंने पंचायत को इस संबंध में आपत्ति जताते हुए बच्चों के गिरने की आशंका बताई थी।
प्राचार्य के अनुसार, “जब नाला गहरा करा तब पंचायत को मना किया था कि बच्चे गिर जाएंगे। नाले के पास कोई सुरक्षित फेंसिंग या दीवार भी नहीं लगाई गई।”
सवाल जिम्मेदारों से ?
जब स्कूल के बिल्कुल पास करीब 10 फीट गहरा नाला मौजूद है और स्कूल में छोटे-छोटे बच्चे पढ़ने आते हैं, तो उनकी सुरक्षा के लिए अब तक कोई पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किया गया ?
क्या किसी हादसे का इंतजार किया जा रहा है ?
क्या नाले के आसपास तत्काल फेंसिंग या सुरक्षा दीवार बनाई जाएगी?
क्या बारिश के दौरान नाले के तेज बहाव से स्कूल के टॉयलेट और आसपास की जमीन को सुरक्षित किया जाएगा?
और ग्रामीणों के पशुओं को नाले में गिरने से बचाने के लिए जिम्मेदार पंचायत कब ठोस कदम उठाएगी ?
स्वतंत्र बौद्धिकपत्र की “जमीनी हकीकत” श्रृंखला में हम आगे भी गांव की ऐसी समस्याओं और विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति को सामने लाते रहेंगे।
— मधुसूदन शर्मा
संपादक, स्वतंत्र बौद्धिकपत्र





