ढीमरखेड़ा। तहसील मुख्यालय ढीमरखेड़ा में शुक्रवार 30 अक्टूबर को आयोजित जनसुनवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई। मौके पर कलेक्टर और एसपी दोनों मौजूद थे, लेकिन जब अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का ज्वलंत मुद्दा उठा, तो पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट जवाब देने से किनारा कर लिया।
क्षेत्र में प्रतिदिन रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें कई वाहनों के नंबर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई न होने पर पत्रकारों ने एसपी से सवाल किए कि आखिर जब सबूत सामने हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
पत्रकारों का आरोप है कि एसपी ने सवालों का सीधा जवाब देने के बजाय मामले को कलेक्टर पर टाल दिया। इतना ही नहीं, सवाल पूछने के दौरान पत्रकारों की अनदेखी भी की गई।
जनसुनवाई का उद्देश्य जनता की समस्याओं का निराकरण और अधिकारियों की जवाबदेही तय करना है। ऐसे में जब एक गंभीर जनसमस्या पर ही अधिकारी जवाब देने से बचें, तो पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजमी है।
अब देखना होगा कि इस मामले में पुलिस और खनिज विभाग क्या ठोस कदम उठाते हैं।





