नीमच। अफीम किसानों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं, पुराने पट्टों की बहाली, मार्फिन प्रशिक्षण एवं अफीम की उचित कीमत निर्धारित करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर भारतीय किसान संघ नीमच जिला इकाई के कोषाध्यक्ष रामगोपाल जी धाकड़ (भोलियावास) ने डिप्टी नारकोटिक्स कमिश्नर (डीएनसी) निखिल कुमार गांधी से मुलाकात कर विस्तार से चर्चा की।
मुलाकात के दौरान धाकड़ ने वर्ष 1997-98 एवं 1998-2000 के दौरान निरस्त किए गए अफीम पट्टों की बहाली का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि अफीम किसानों को निर्धारित मात्रा में मार्फिन निकालने की प्रक्रिया के संबंध में पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया जाता। इसके बावजूद मार्फिन के मानक तय कर दिए जाते हैं। परिणामस्वरूप कई किसानों के पट्टे रोक दिए जाते हैं अथवा उन्हें अपात्र घोषित कर सूची से बाहर कर दिया जाता है।
उन्होंने मांग की कि किसानों को मार्फिन निकालने की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक प्रक्रिया का समुचित प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि किसान निर्धारित मानकों को समझ सकें और अनावश्यक रूप से पट्टे निरस्त होने जैसी परेशानियों से बच सकें।
इसके साथ ही रामगोपाल धाकड़ ने अफीम की खेती में लगातार बढ़ती लागत, महंगी होती कृषि सामग्री एवं दवाइयों के खर्च का हवाला देते हुए अफीम की सरकारी कीमत बढ़ाने की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि बढ़ती लागत के अनुरूप अफीम का उचित मूल्य मिलना किसानों के हित में आवश्यक है।इस पर डिप्टी नारकोटिक्स कमिश्नर (डीएनसी) निखिल कुमार गांधी ने बताया कि नारकोटिक्स विभाग द्वारा जल्द ही विभागीय कार्यप्रणाली एवं समय-सीमा को निर्धारित और सीमित करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। साथ ही ग्रामीण स्तर पर शिविर आयोजित कर अफीम नीति, मार्फिन की प्रक्रिया, किसानों से जुड़े नियमों एवं अफीम की फसल की सुरक्षा के तरीकों के संबंध में किसानों और ग्रामीणों को जागरूक किया जाएगा।
इस मुलाकात से अफीम किसानों की पुरानी समस्याओं को विभागीय स्तर पर उठाने के साथ ही प्रशिक्षण, पट्टा बहाली और उचित मूल्य जैसे मुद्दों पर सकारात्मक पहल की उम्मीद जगी है।





